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ऋषिकेश। शारदा पीठ कश्मीर के शंकराचार्य अमृतानंद के तीर्थनगरी ऋषिकेश पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने होटल में उनका स्वागत किया। समाजसेवी अक्षत गोयल के नेतृत्व में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस दौरान शंकराचार्य अमृतानंद ने गौ माता और सनातन धर्म के संरक्षण को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गौ माता का स्थान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की जीवनशैली, संस्कार और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। सदियों से गौ सेवा को करुणा, सेवा और संस्कार का प्रतीक माना जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की व्यापक जीवन-दृष्टि प्रकृति, जीव-जंतुओं और सभी प्राणियों के प्रति संवेदना एवं संरक्षण का संदेश देती है। गौ सेवा भी इसी भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। परिवार और सामाजिक संस्थाएं मिलकर नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों, परंपराओं और गौ सेवा के महत्व से परिचित कराएं।
शंकराचार्य अमृतानंद ने कहा कि गौ संरक्षण के लिए केवल धार्मिक भावनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि धरातल पर भी ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। बेसहारा और बीमार गोवंश की देखभाल, गौशालाओं को सुदृढ़ करना और पशुओं के प्रति समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सिर्फ पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सेवा, सत्य, संयम, करुणा और कर्तव्य का मार्ग है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ मानवता, प्रकृति और जीव-जगत के प्रति संवेदनशीलता को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
कार्यक्रम में कपिल गुप्ता राष्ट्रीय संयोजक नमामि नर्मदा संघ, सुशीला सेमवाल प्रदेश अध्यक्ष नमामि नर्मदा संघ, प्रमोद शर्मा प्रदेश अध्यक्ष मान्यता प्राप्त प्रबंधकीय विद्यालय संगठन, राजीव थपलियाल राष्ट्रीय महासचिव इंडियन बॉडीबिल्डिंग फेडरेशन (IBBF), बालवीर महंत गुरुद्वारा ऋषिकेश, अधिवक्ता अविनाश अग्रवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




