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ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में आवारा सांडों और लावारिस पशुओं के कारण लगातार हो रहे सड़क हादसों और जनहानि को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। गुरुवार को समाजसेवी सुधीर रॉय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने “आवारा पशुओं से ऋषिकेश बचाओ अभियान” के तहत नगर निगम कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने ढोल-नगाड़े बजाकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद निगम इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पाया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऋषिकेश की सड़कों पर बड़ी संख्या में आवारा सांड और लावारिस पशु घूम रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। सबसे अधिक खतरा स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को बना रहता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आईडीपीएल क्षेत्र में आवारा सांड की टक्कर से आनंद पाल की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक नहीं जागा है।
ढोल बजाकर जगाया सोया प्रशासन
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नगर निगम प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं दिख रहा है। इसलिए सोए हुए अधिकारियों को जगाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से ढोल-नगाड़े बजाकर विरोध दर्ज कराया गया। उनका कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और भी लोगों की जान जा सकती है।
ज्ञापन में रखीं चार प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के बाद समाजसेवी सुधीर रॉय, राजपाल खरोला और अन्य नागरिकों ने सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गईं—
ऋषिकेश क्षेत्र में आवारा एवं निराश्रित पशुओं की समस्या का शीघ्र और स्थायी समाधान किया जाए।
निराश्रित पशुओं के लिए शीघ्र कांजी हाउस (गौशाला) और गौ-धाम का निर्माण कराया जाए।
27 जुलाई 2026 को आवारा पशु के कारण जान गंवाने वाले आनंद पाल के परिवार को नगर निगम की ओर से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
नगर निगम ने क्या कहा?
मामले पर सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट ने कहा कि नगर निगम आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि रायवाला में लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर कांजी हाउस बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए बजट संबंधी फाइल शासन स्तर पर अंतिम चरण में है। जैसे ही बजट स्वीकृत होगा, निर्माण कार्य तेजी से शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांजी हाउस बनने के बाद आवारा पशुओं की समस्या के समाधान में काफी मदद मिलेगी।
जनता की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि नगर निगम ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि ऋषिकेश जैसी विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी में आवारा पशुओं का आतंक शहर की छवि को भी प्रभावित कर रहा है और अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।







