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ऋषिकेश। पुलिस अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने के प्रयास से जुड़े मामले में देहरादून की विशेष न्यायाधीश अंजली बेंजवाल की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने दिनेश कोठारी की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए संबंधित थाना प्रभारी को मामले में सामने आए नए तथ्यों को पहले से दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 181/2026 की विवेचना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला?
मामले के अनुसार, दिनेश कोठारी ने आरोप लगाया था कि 11 मई 2026 को अतुल गुप्ता और उनके साथियों ने कथित तौर पर हथियारों के साथ उनके कार्यालय में घुसकर मारपीट की और सोने की चेन लूट ली। इस संबंध में थाना ऋषिकेश में FIR संख्या 177/2026 दर्ज हुई थी।इसके बाद अतुल गुप्ता की ओर से भी कोठारी के खिलाफ क्रास FIR संख्या 178/2026 दर्ज कराई गई। इसी घटनाक्रम से जुड़े एक अन्य मामले में अतुल गुप्ता ने अनुज गोयल, शुभम चौहान, आदित्य लोधी और अंशुल भारती के खिलाफ FIR संख्या 181/2026 दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कोठारी की ओर से दर्ज मुकदमे में गंभीर धाराएं न लगने देने के लिए पुलिस अधिकारियों को कथित रूप से प्रभावित करने के उद्देश्य से 20 से 25 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप के मुताबिक, इसमें से 2 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे और पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 1.75 लाख रुपये बरामद किए थे।
PC Act के तहत कार्रवाई की मांग
दिनेश कोठारी ने अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि रकम कथित तौर पर आपराधिक षड्यंत्र के तहत बिचौलियों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए दी गई। उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 8 और 12 के तहत अलग मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने उपलब्ध सामग्री के प्रथम दृष्टया अवलोकन के बाद कथित रकम के स्रोत, भुगतान, बरामदगी, रकम दिए जाने के उद्देश्य और किसी लोक सेवक की संभावित संलिप्तता से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच को आवश्यक माना।
हालांकि, अदालत ने अलग से नई FIR दर्ज करने के बजाय प्रार्थना पत्र में बताए गए तथ्यों को पहले से दर्ज FIR संख्या 181/2026 की विवेचना में शामिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वर्तमान विवेचक संबंधित प्रावधानों के तहत जांच के लिए सक्षम नहीं हैं तो वे उच्चाधिकारियों से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त कर सकते हैं।
अदालत ने आदेश की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए SSP देहरादून को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।







