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देहरादून। उत्तराखंड के वन विभाग में लंबे समय से प्रोन्नति का इंतजार कर रहे छह वन अधिकारियों को आखिरकार पदोन्नति मिल गई है। उत्तराखंड शासन की ओर से जारी आदेश के बाद इन अधिकारियों को सहायक वन संरक्षक (Assistant Conservator of Forests-ACF) के पद पर प्रोन्नत किया गया है। प्रोन्नति से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।
अब तक ये सभी अधिकारी प्रभारी सहायक वन संरक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। शासन के आदेश के बाद उन्हें अब नियमित रूप से सहायक वन संरक्षक के पद पर प्रोन्नत किया गया है।
इन छह अधिकारियों को मिली पदोन्नति
प्रोन्नत होने वाले अधिकारियों में अनिल कुमार पैन्यूली, संदीप गिरी, जुगल किशोर, कन्हैया लाल, संचिता वर्मा और धीरज सिंह रावत शामिल हैं। सभी अधिकारी लंबे समय से वन विभाग में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
इनमें धीरज सिंह रावत पूर्व में बड़कोट रेंज अधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि वह अगले माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति से ठीक पहले मिली यह पदोन्नति उनके लिए विशेष महत्व रखती है।
फौज से वन सेवा तक अनिल पैन्यूली का प्रेरणादायी सफर
छह अधिकारियों की पदोन्नति में अनिल कुमार पैन्यूली का सफर खास तौर पर उल्लेखनीय है। लंबे समय से मुनि की रेती में एसडीओ देवप्रयाग का कार्यभार संभाल रहे पैन्यूली ने वन सेवा में आने से पहले भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
कारगिल युद्ध के दौरान विभिन्न पोस्टों पर तैनाती के दौरान उन्होंने साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। सेना के बाद उन्होंने वन विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं और वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज में तैनाती के दौरान उन्होंने बाघों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई कार्यों में योगदान दिया। इसके बाद उन्होंने शिवपुरी रेंज की जिम्मेदारी संभाली और वर्तमान में प्रभारी एसडीओ के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर प्रतिबद्धता
अनिल कुमार पैन्यूली का कहना है कि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अहम है। वन्यजीवों के संरक्षण के साथ-साथ जंगलों और पर्यावरण को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीव संवर्धन और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उत्तराखंड को देश-दुनिया में प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को ‘ऑक्सीजन डिपो’ के रूप में मिली पहचान को बनाए रखने के लिए जंगलों का संरक्षण और संवर्धन प्राथमिकता में होना चाहिए।
वन विभाग में खुशी का माहौल
लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे छह अधिकारियों को नियमित पदोन्नति मिलने के बाद वन विभाग में खुशी का माहौल है। विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने सभी पदोन्नत अधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं।
वन विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि इन अधिकारियों के अनुभव का लाभ विभाग को आने वाले समय में मिलेगा। खासकर वन्यजीव संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।
लंबे इंतजार के बाद मिली यह पदोन्नति न केवल छह अधिकारियों के लिए करियर की नई जिम्मेदारी लेकर आई है, बल्कि वन विभाग में उनके अनुभव और सेवाओं को नई भूमिका में आगे बढ़ाने का अवसर भी देगी।







