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ऋषिकेश। गुमानीवाला स्थित लालपानी कूड़ा निस्तारण प्लांट के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर नगर निगम के कूड़ा वाहनों का प्रवेश रोकने और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के मामले में कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त चंद्रकान्त भट्ट की तहरीर पर पुलिस ने सात नामजद व्यक्तियों समेत अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया है।
पुलिस के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को बीट संख्या-01, गुमानीवाला स्थित लालपानी कूड़ा निस्तारण प्लांट में स्थानीय निवासियों द्वारा प्लांट में कूड़ा लाए जाने का विरोध किया जा रहा था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी, जिससे नगर निगम के कूड़ा वाहनों का प्लांट में प्रवेश बाधित हो गया।
बताया गया कि नगर निगम के सफाई निरीक्षक जब प्लांट का निरीक्षण करने पहुंचे तो स्थानीय लोगों द्वारा कूड़ा निस्तारण को लेकर विरोध जताया गया। नगर निगम की ओर से लोगों को समझाने और कूड़ा वाहनों को प्लांट में प्रवेश देने का प्रयास किया गया, लेकिन मुख्य द्वार पर की गई तालाबंदी के चलते वाहन अंदर नहीं जा सके।
नगर निगम का कहना है कि ऋषिकेश शहर से प्रतिदिन एकत्रित होने वाले कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया प्लांट में कूड़ा वाहनों के प्रवेश पर निर्भर है। वाहनों का प्रवेश रुकने से कूड़ा निस्तारण व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इस संबंध में सहायक नगर आयुक्त चंद्रकान्त भट्ट ने कोतवाली ऋषिकेश में लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए धारा 221/223(a)/189(2)/126(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई शुरू की है।
मामले में पुलिस ने लालमणि रतूड़ी, पुरुषोत्तम बडोनी, लाल सिंह बोरा, राजेन्द्र गुनसोला, विनोद प्रसाद सेमवाल, रंजीत और रमदान को नामजद किया है, जबकि कुछ अन्य व्यक्तियों को भी मामले में शामिल किया गया है।पुलिस ने मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुमित चौधरी को सौंपी है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, लालपानी प्लांट को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्तियां और कूड़ा निस्तारण से जुड़ी समस्याएं पहले भी चर्चा में रही हैं। ऐसे में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ सकता है। पुलिस की विवेचना में तालाबंदी की परिस्थितियों, मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका और सरकारी कार्य में कथित रूप से उत्पन्न बाधा से जुड़े तथ्यों को जांचा जाएगा।




