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ऋषिकेश। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां अब धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को सीटवार स्तर पर आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। पार्टी की ओर से मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, क्षेत्र में उनकी स्थिति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर सर्वे और समीक्षा की खबरें पहले से सामने आ रही हैं।
इसी बीच भाजपा के भीतर कुछ बड़े नेताओं को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारने को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। इनमें गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का नाम प्रमुखता से चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, बलूनी को किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा या उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारने का फैसला हुआ है अथवा नहीं, इसकी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
चार विधानसभा सीटों को लेकर चर्चाओं ने पकड़ा जोर
राजनीतिक सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि अनिल बलूनी की संभावित विधानसभा एंट्री को ध्यान में रखते हुए भाजपा स्तर पर कुछ विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति का आकलन कराया गया है। जिन चार सीटों के नाम चर्चा में हैं, उनमें यमकेश्वर और रामनगर के साथ ऋषिकेश और डोईवाला शामिल बताए जा रहे हैं।
इनमें यमकेश्वर और रामनगर गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि ऋषिकेश और डोईवाला हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में आते हैं। निर्वाचन क्षेत्र संबंधी आधिकारिक सूची में भी यमकेश्वर को गढ़वाल और ऋषिकेश तथा डोईवाला को हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत दर्शाया गया है। सूत्रों का दावा है कि इन क्षेत्रों में स्थानीय समीकरण, संगठन की स्थिति, संभावित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और जनता की राय जैसे पहलुओं को लेकर जानकारी जुटाई गई है। हालांकि, इन चारों सीटों पर अनिल बलूनी के लिए सर्वे होने और उसकी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचने की बात की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
यमकेश्वर पर सबसे ज्यादा नजर
इन चर्चाओं के बीच यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र खास तौर पर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। इसकी एक वजह भाजपा नेता एवं अधिवक्ता विपिन कैंथोला की क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता को भी माना जा रहा है।बताया जा रहा है कि कैंथोला लगातार क्षेत्र में लोगों के बीच पहुंच रहे हैं और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनसंपर्क कर रहे हैं। उनकी गतिविधियों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।विपिन कैंथोला को अनिल बलूनी के करीबी नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में यमकेश्वर में उनकी सक्रियता को केवल सामान्य राजनीतिक गतिविधि मानने के बजाय आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
खुद मैदान में उतरेंगे कैंथोला या निभाएंगे सारथी की भूमिका?
यमकेश्वर की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि अगर अनिल बलूनी को विधानसभा चुनाव में उतारने की रणनीति बनती है तो स्थानीय स्तर पर उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी किसके कंधों पर होगी।इसी कड़ी में विपिन कैंथोला का नाम सामने आ रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल भी उठ रहा है कि कैंथोला खुद विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं या फिर अनिल बलूनी के संभावित चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।हालांकि, अभी तक न तो कैंथोला की ओर से अपनी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने आई है और न ही भाजपा ने अनिल बलूनी को किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने का निर्णय सार्वजनिक किया है।
सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतार चुकी है भाजपा
भाजपा इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों में सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारने की रणनीति अपना चुकी है। यही वजह है कि उत्तराखंड में भी किसी बड़े सांसद को विधानसभा चुनाव लड़ाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं स्वाभाविक रूप से जोर पकड़ रही हैं।वहीं, भाजपा उत्तराखंड में 2027 के चुनाव को लेकर मौजूदा विधायकों की स्थिति का भी आकलन कर रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पार्टी विधायकों के प्रदर्शन को कई मानकों पर परखने की तैयारी में है, जबकि पिछली बार हारी हुई सीटों पर भी मजबूत दावेदारों की तलाश की जा रही है।
मुख्यमंत्री की सीट को लेकर भी मंथन की चर्चा
इधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संभावित विधानसभा सीट को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है। मुख्यमंत्री वर्तमान में चम्पावत विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, लेकिन आगामी चुनाव को लेकर पार्टी स्तर पर सीटों और उम्मीदवारों के समीकरणों की समीक्षा की खबरें सामने आ रही हैं।ऐसे में मुख्यमंत्री की सीट, अनिल बलूनी की संभावित विधानसभा एंट्री और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा—इन तीनों पहलुओं ने भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
फैसला आलाकमान के हाथ में
फिलहाल भाजपा की ओर से अनिल बलूनी को विधानसभा चुनाव लड़ाने, चारों सीटों पर उनके लिए सर्वे कराने या यमकेश्वर को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए मौजूदा चर्चाओं को राजनीतिक सूत्रों और पार्टी के अंदर चल रहे संभावित मंथन के तौर पर ही देखा जा रहा है।लेकिन जिस तरह यमकेश्वर में विपिन कैंथोला की सक्रियता, चार विधानसभा क्षेत्रों के संभावित सर्वे और बड़े नेताओं की सीटों को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे इतना जरूर है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा अब सीटवार समीकरणों को परखने के चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।
आने वाले समय में भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व किस नेता को किस सीट से मैदान में उतारता है, यही इन चर्चाओं की दिशा तय करेगा। फिलहाल यमकेश्वर से लेकर ऋषिकेश और डोईवाला तक राजनीतिक हलकों की निगाहें भाजपा के अगले कदम पर टिकी हैं।
