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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी स्थित मायापुर में THDC की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम करीब 7 बजे अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय टनल के अंदर 22 मजदूर काम कर रहे थे। पानी के तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से कई मजदूर फंस गए।
ताजा उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार 7 मजदूरों की मौत हुई है और 14 मजदूर घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि गंभीर स्थिति की आशंका को देखते हुए श्रीनगर बेस अस्पताल और एम्स ऋषिकेश को भी अलर्ट पर रखा गया।
मृतकों के नाम
अधिकारियों के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के नाम मुकेश, प्रदीप पंवार, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र, लकेश्वर और घुनेश्वर बताए गए हैं।
घायलों में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के मजदूर
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक घायलों में बिहार के 2, झारखंड के 5, छत्तीसगढ़ के 2, पंजाब के 1 और उत्तराखंड के 1 मजदूर शामिल हैं।
रेस्क्यू में जुटीं कई एजेंसियां
हादसे के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। NDRF के 57, SDRF के 42, ITBP के 21, स्थानीय पुलिस के 22, फायर सर्विस के 9 और DDRF के 4 जवानों को रेस्क्यू अभियान में लगाया गया। HCC की मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद भी ली गई।
परियोजना में निर्माण कार्य Hindustan Construction Company (HCC) द्वारा किया जा रहा था, जबकि परियोजना THDC के स्वामित्व वाली है। THDC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना 4×111 मेगावाट की है और इसमें लंबी सुरंगों का निर्माण शामिल है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई?
हादसे के बाद सुरंग निर्माण में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष और अन्य आलोचकों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और हादसे की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी और तथ्यात्मक अंतर समझना जरूरी है—अभी तक उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं में THDC के अधिकारियों को इस हादसे के लिए दोषी ठहराने वाली कोई जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इस समय सीधे यह कहना कि THDC अधिकारियों की लापरवाही से हादसा हुआ, तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
हालांकि, जांच में यह जरूर देखा जाना चाहिए कि हादसे से पहले टनल में पानी के रिसाव, भूगर्भीय हलचल या मलबा आने के संकेत मिले थे या नहीं; उनकी निगरानी कैसे की जा रही थी; श्रमिकों के लिए आपातकालीन निकासी मार्ग क्या था; अलार्म/कम्युनिकेशन सिस्टम और आपातकालीन रिस्पांस व्यवस्था कितनी प्रभावी थी; तथा साइट पर निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।
जांच से ही साफ होगा कि गलती प्राकृतिक आपदा थी या मानवीय चूक
पहाड़ों में टनल निर्माण के दौरान अचानक भू-स्खलन और पानी का प्रवेश एक गंभीर प्राकृतिक खतरा है। लेकिन प्राकृतिक खतरा अपने आप में जिम्मेदारी तय नहीं करता। असली सवाल यह है कि क्या खतरे का पूर्व आकलन किया गया था और उससे निपटने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय लागू थे?
यदि जांच में सामने आता है कि पानी के रिसाव अथवा भूगर्भीय अस्थिरता के संकेत पहले से मौजूद थे और इसके बावजूद मजदूरों को टनल के अंदर काम कराया गया, या आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं थी, तो THDC और परियोजना का निर्माण कर रही एजेंसी HCC के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है कि हादसे के कारण और संभावित मानवीय लापरवाही की स्वतंत्र तकनीकी जांच बेहद जरूरी है। सात मजदूरों की मौत के बाद केवल राहत और बचाव तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि आखिर टनल के अंदर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए हादसे से पहले क्या-क्या इंतजाम मौजूद थे और उनमें कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।
CM धामी ने लिया घटना स्थल का जायजा
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में एक उच्च स्तरीय बैठक की और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने बताया कि जैसे ही शाम को इस घटना की सूचना मिली, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया था.
मुख्यमंत्री खुद घटना स्थल पंहुचे और टनल के भीतर जाकर स्थिति को देखा और परखा उन्होंने स्पष्ट किया की सरकार का इस समय सबसे पहला और सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. सभी वरिष्ठ अधिकारी, प्रशासनिक अमला और राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं. प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए. उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ घंटों में अंदर फंसे सभी लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया जाएगा.







