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ऋषिकेश। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को शांति नगर, ऋषिकेश में गरीब एवं वंचित बच्चों के हित में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के निर्देशानुसार तहसील विधिक सेवा समिति, ऋषिकेश द्वारा आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बाल श्रम के प्रति जागरूकता फैलाना तथा बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों और शिक्षा के महत्व की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में तहसील विधिक सेवा समिति, ऋषिकेश की सचिव तान्या मिड्ढा ने उपस्थित बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए बाल श्रम के दुष्प्रभावों, बच्चों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है तथा बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
शिविर के दौरान बच्चों और अभिभावकों को यह भी बताया गया कि किसी भी बच्चे से श्रम कराना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों की शिकायत संबंधित अधिकारियों या विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से की जा सकती है। साथ ही शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय जाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर श्री सांई सेवा धाम ट्रस्ट के सहयोग से जरूरतमंद एवं गरीब बच्चों को स्कूल बैग और नोटबुक वितरित किए गए। इस पहल से बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने बाल श्रम उन्मूलन और प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाकर ही बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है और बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में श्री सांई सेवा धाम ट्रस्ट के प्रतिनिधि प्रमोद नौटियाल, न्यायालय कर्मचारी, प्राविधिक कार्यकर्ता, गरीब एवं वंचित बच्चे तथा उनके अभिभावकों सहित करीब 130 लोगों ने भाग लिया।



