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ऋषिकेश। कृषि उत्पादन मंडी समिति ऋषिकेश परिसर में नवनिर्मित दुकानों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंडी के पुराने लाइसेंसधारी व्यापारियों ने आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मंडी प्रशासन पर अनियमितता, पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। व्यापारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आवंटन प्रक्रिया को निरस्त करने और पारदर्शी तरीके से दोबारा आवंटन किए जाने की मांग की है।
वर्ष 2002 से मंडी में लाइसेंसधारी व्यापारी सुनील कुमार जायसवाल ने आरोप लगाया कि नवनिर्मित दुकानों के आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि पात्र और वर्षों से मंडी में कार्यरत व्यापारियों को दरकिनार कर धनबल और प्रभाव के आधार पर दुकानों का आवंटन किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक दुकान के आवंटन में लगभग 30 से 35 लाख रुपये तक के लेन-देन की चर्चा है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
व्यापारी का आरोप है कि मंडी में बनी 10 नई दुकानों में से 7 दुकानें ऐसे बाहरी लोगों को आवंटित कर दी गईं, जिनका मंडी के कार्यों से कोई अनुभव नहीं है। आरोप यह भी है कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कागजों में वाहनों की वास्तविक क्षमता से अधिक माल की आवक और टैक्स दर्शाकर फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए, ताकि उन्हें पात्र साबित किया जा सके।
सुनील कुमार जायसवाल ने बताया कि जब उन्होंने आवंटन प्रक्रिया, नियमावली और चयन के आधार के संबंध में मंडी समिति के अधिकारियों एवं सचिव से जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक उत्तर देने के बजाय डांट-फटकार कर भगा दिया गया और डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। उनका आरोप है कि मंडी सचिव ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें स्वयं आवंटन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।
व्यापारी ने मांग की है कि विवादित आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर पात्रता और नियमों के अनुसार दोबारा दुकानों का आवंटन किया जाए, ताकि वर्षों से मंडी में कार्यरत व्यापारियों के साथ न्याय हो सके।
इस मामले में क्षेत्रीय पार्षद रामकुमार संगर ने भी व्यापारियों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है तो प्रशासन को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
व्यापारी सुनील कुमार जायसवाल और पार्षद रामकुमार संगर ने संयुक्त रूप से कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव को शिकायती पत्र सौंपकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
अब यह मामला व्यापारियों और मंडी प्रशासन के बीच टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। यदि जांच की मांग पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो व्यापारी आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंडी प्रशासन और संबंधित विभाग इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं।
इस मामले को लेकर जब मंडी सचिव से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया उनका बयान आने के बाद प्रकाशित किया जाएगा.

