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ऋषिकेश:ऋषिकेश की स्थानीय अदालत ने बैंकिंग लेनदेन और आपसी विश्वास को मजबूती देने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय अपर सिविल जज (जू.डि.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट, तानिया मिद्धा की अदालत ने चेक बाउंस (NI Act की धारा 138) के एक मामले में अभियुक्त नवीन प्रसाद भट्ट को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2020 का है, जब शिकायतकर्ता (परिवादी) ने अभियुक्त को ₹2 लाख की राशि उधार दी थी। इस उधारी को चुकाने के लिए अभियुक्त ने चेक संख्या-021865 जारी किया था। जब शिकायतकर्ता ने चेक बैंक में लगाया, तो वह “Funds Insufficient” (खाते में पर्याप्त राशि न होना) की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। विधिक नोटिस भेजने के बाद भी जब राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय का सख्त रुख
मुकदमे के दौरान अभियुक्त पक्ष ने बचाव में तर्क दिया कि उनके द्वारा चेक जारी नहीं किया गया था। हालांकि, अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा:
”चेक बाउंस होना केवल एक व्यक्तिगत आर्थिक क्षति नहीं है, बल्कि यह देश की बैंकिंग प्रणाली और अर्थव्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को भी प्रभावित करता है।”
सजा और हर्जाना
सभी पक्षों को सुनने के बाद, न्यायाधीश तानिया मिद्धा ने निम्नलिखित आदेश जारी किए:
- कारावास: अभियुक्त को 3 माह के सश्रम कारावास की सजा।
- आर्थिक दंड: अभियुक्त पर कुल ₹3,05,000 का जुर्माना लगाया गया है।
- प्रतिकर: जुर्माने की यह पूरी राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे (Compensation) के रूप में दी जाएगी।
- अतिरिक्त सजा: जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
कानूनी टीम की सफलता
- इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव सिंह मलिक और एडवोकेट नवीन रतूड़ी ने दमदार पैरवी की। सफल कानूनी संघर्ष के बाद परिवादी पक्ष ने अपने अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।



