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ऋषिकेश। राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्कूल लेक्चरर (हिंदी) भर्ती परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाकर चयन कराने के मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश (AIIMS ऋषिकेश) में कार्यरत सहायक प्रशासनिक अधिकारी भी है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मूल अभ्यर्थी दलपत लाल मीना और कथित दलाल रूकमेष मीना शामिल हैं। रूकमेष मीना वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात है। जांच में सामने आया है कि उसने दलपत मीना की जगह डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा दिलाने की व्यवस्था की थी।
15 लाख रुपये में तय हुई थी डील
एसओजी की जांच के अनुसार, स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा पास करने के लिए दलपत लाल मीना ने रूकमेष मीना से संपर्क किया था। दोनों के बीच 15 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। आरोप है कि दलपत ने यह रकम जयपुर में अलग-अलग स्थानों पर रूकमेष को सौंपी।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरी साजिश सुनियोजित तरीके से रची गई थी, ताकि वास्तविक अभ्यर्थी की जगह किसी अन्य व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर चयन सुनिश्चित कराया जा सके।
प्रवेश पत्र में फोटो और जन्मतिथि से की गई छेड़छाड़
एसओजी की पड़ताल में फर्जीवाड़े का तरीका भी सामने आया है। दलपत मीना के प्रवेश पत्र में छेड़छाड़ कर ऑनलाइन आवेदन में लगी मूल फोटो की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो प्रिंट करवाई गई। इसके अलावा पहचान छिपाने के लिए जन्मतिथि में भी बदलाव किया गया।
दलपत की वास्तविक जन्मतिथि 15 जुलाई 1986 थी, जिसे प्रवेश पत्र में बदलकर 15 जुलाई 1997 कर दिया गया। इसके बाद उसकी जगह एक डमी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में बैठाकर परीक्षा दिलाई गई।
एम्स ऋषिकेश अधिकारी की भूमिका की जांच
मामले में एम्स ऋषिकेश के अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी किसी बड़े भर्ती परीक्षा गिरोह से जुड़ा हुआ था। एसओजी अब डमी अभ्यर्थी की पहचान, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और धन के लेन-देन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।
भर्ती माफिया पर एसओजी का शिकंजा
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और डमी अभ्यर्थियों के मामलों पर एसओजी लगातार कार्रवाई कर रही है। ताजा मामले में एम्स ऋषिकेश के अधिकारी का नाम सामने आने से भर्ती परीक्षा माफिया और सरकारी संस्थानों से जुड़े लोगों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
एसओजी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।




