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ऋषिकेश। वर्ष 2022 में सामने आए नवविवाहिता आरती की संदिग्ध मौत के मामले में ऋषिकेश की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति समेत चारों आरोपियों को धारा 304बी आईपीसी के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला 10 सितंबर 2026 को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ऋषिकेश, देहरादून की अदालत में सुनाया गया। मामला सत्र परीक्षण संख्या 98/2022 और थाना रानीपोखरी के मुकदमा अपराध संख्या 12/2022 से संबंधित था।
शादी के करीब ढाई महीने बाद हुई थी आरती की मौत
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक आरती का विवाह 12 दिसंबर 2021 को ग्राम भोगपुर निवासी पवन रावत के साथ हुआ था। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद आरती को दहेज के लिए परेशान किया जाता था। मामले में पति पवन रावत, विपिन रावत, राजेश्वरी देवी और चंद्रशेखर रावत को आरोपी बनाया गया था.
अभियोजन के अनुसार 26 फरवरी 2022 की शाम आरती ने अपनी बड़ी बहन पूजा से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान वह कथित तौर पर काफी परेशान और रो रही थी तथा बातचीत के बीच फोन कट गया। इसके बाद परिजनों का आरती से संपर्क नहीं हो सका। अगले दिन सुबह पवन रावत आरती के मायके पहुंचा और बताया कि आरती बाथरूम में गिरने से घायल हो गई है तथा उसे हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट ले जाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को आरती की मौत की जानकारी मिली।
पुलिस ने दर्ज किया था दहेज मृत्यु का मुकदमा
घटना के बाद रानीपोखरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 304बी आईपीसी के तहत आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद यह मामला सेशन कोर्ट को सौंपा गया। बाद में आरोप तय हुए और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल 14 गवाह पेश किए। इनमें मृतका के पिता विजेंद्र सिंह, मां बसंती देवी, रिश्तेदार, पुलिस अधिकारी और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक शामिल थे।
पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने अदालत को बताया कि आरती का पोस्टमार्टम 27 फरवरी 2022 को किया गया था। बाहरी परीक्षण में कोई स्पष्ट चोट नहीं मिली। चिकित्सकीय राय में मौत का निश्चित कारण तत्काल निर्धारित नहीं किया जा सका, जिसके चलते विसरा को हिस्टोपैथोलॉजिकल और रासायनिक परीक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया था।
अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ की रिपोर्ट में हृदय संबंधी परीक्षण के दौरान मिली फोकल पल्मोनरी कैल्सिफिकेशन को मृत्यु का कारण नहीं माना गया।
अदालत ने कहा—धारा 304बी के सभी जरूरी तत्व साबित नहीं हुए
अदालत ने अपने फैसले में धारा 304बी आईपीसी के लिए आवश्यक तत्वों पर विचार किया। फैसले के अनुसार अभियोजन को यह साबित करना आवश्यक था कि महिला की मृत्यु असामान्य परिस्थितियों में हुई, विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई, पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता या उत्पीड़न किया गया और वह क्रूरता दहेज की मांग से संबंधित तथा मृत्यु से ठीक पहले की अवधि में हुई थी।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि मामले में धारा 304बी आईपीसी के आवश्यक तत्व पूर्ण रूप से साबित नहीं हो सके। केवल यह तथ्य कि आरती की शादी के सात वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हुई, अपने आप में आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
पति समेत चारों आरोपी दोषमुक्त
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इसके बाद पवन रावत, विपिन रावत, राजेश्वरी देवी और चंद्रशेखर रावत को थाना रानीपोखरी के मुकदमा अपराध संख्या 12/2022 में धारा 304बी आईपीसी के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया।
फैसले में दर्ज है कि पवन रावत और राजेश्वरी देवी न्यायिक हिरासत में थे। अदालत ने उनके संबंध में रिहाई परवाना जारी करने का निर्देश दिया, बशर्ते वे किसी अन्य मामले में निरुद्ध न हों। वहीं विपिन रावत और चंद्रशेखर रावत जमानत पर थे, इसलिए उनके बंधपत्र निरस्त कर जमानतदारों को उन्मोचित करने का आदेश दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजेंद्र सिंह सजवाण और अधिवक्ता विकास नेगी ने आरोपियों की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और आरोपों के संबंध में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से की गई ठोस पैरवी को आरोपियों के पक्ष में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







