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ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में आवारा पशुओं और गोवंश का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर की सड़कों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु अब राहगीरों के लिए जानलेवा साबित होने लगे हैं। ताजा मामला देहरादून रोड का है, जहां शुक्रवार सुबह एक आवारा गोवंश ने सड़क से गुजर रही महिला पर अचानक हमला कर दिया। हमले में महिला को इतनी गंभीर चोट आई कि उसके पेट की छोटी आंत तक बाहर निकल आई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल महिला को पहले ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार घायल महिला की पहचान दुलारी देवी के रूप में हुई है। शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे महिला को गंभीर अवस्था में ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लाया गया था। अस्पताल के चिकित्सक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला पर सांड अथवा गाय ने हमला किया था। गोवंश के सींग लगने से महिला के पेट के दाहिने हिस्से में गंभीर चोट आई। चोट इतनी गहरी थी कि पेट के अंदर मौजूद छोटी आंत बाहर निकल आई थी।
महिला की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल में चिकित्सकों ने तत्काल प्राथमिक उपचार किया। इसके बाद बिना देर किए बेहतर उपचार के लिए महिला को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए परिजनों और स्थानीय लोगों में भी चिंता बनी हुई है।
नगर निगम के दावों पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ऋषिकेश नगर निगम की आवारा पशुओं को नियंत्रित करने की व्यवस्था और दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के देहरादून रोड, एम्स मार्ग, बाजार क्षेत्रों और विभिन्न प्रमुख चौराहों पर आए दिन आवारा गोवंश के झुंड सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं। कई बार ये पशु सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं तो कभी अचानक वाहनों और राहगीरों के सामने आ जाते हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। कई बार आवारा पशुओं के आपस में लड़ने के दौरान राहगीरों के चोटिल होने और वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान होता नजर नहीं आ रहा है।
किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि आवारा पशुओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर पशुओं को पकड़ने और व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। यदि प्रमुख मार्गों से लेकर शहर के अंदरूनी इलाकों तक आवारा पशुओं का जमावड़ा इसी तरह बना रहा तो भविष्य में इससे भी गंभीर हादसे हो सकते हैं।
देहरादून रोड पर महिला के साथ हुई यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि शहर में आवारा गोवंश के प्रबंधन को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि इस दर्दनाक घटना के बाद नगर निगम प्रशासन कब जागता है और शहरवासियों को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऋषिकेश की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं से आम जनता को कब राहत मिलेगी? क्या नगर निगम किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?












