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देहरादून। उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड लौट रहा एक हेलीकॉप्टर दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में हेली सेवाओं की सुरक्षा, मौसम संबंधी मानकों और उड़ान संचालन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सभी छह मौतों की पुष्टि चमोली पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार ने की है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से यात्रियों को लेकर सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। इसी दौरान चमोली जनपद के जोशीमठ क्षेत्र में मारवाड़ी पुल के ऊपर जेपी पावर हाउस की दिशा में हेलीकॉप्टर पहाड़ी से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और सेना की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
रेस्क्यू टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों के शव बरामद कर लिए। घटनास्थल तक सड़क मार्ग की सीधी पहुंच नहीं होने के कारण शवों को दुर्गम क्षेत्र से सड़क तक लाने का अभियान भी लगातार जारी रहा।
खराब मौसम के बावजूद उड़ान पर उठे सवाल
इस हादसे का सबसे गंभीर पहलू उस समय के मौसम से जुड़ा है, जब हेलीकॉप्टर ने बद्रीनाथ से उड़ान भरी। मौसम विभाग की ओर से 30 अक्टूबर को चमोली जनपद के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। चेतावनी में गरज-चमक, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई थी। बद्रीनाथ-ज्योतिर्मठ क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का भी पूर्वानुमान था। इसके बावजूद हेलीकॉप्टर का उड़ान भरना अब जांच के दायरे में आने वाला महत्वपूर्ण विषय है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मौसम पल-पल बदलता है। ऊंची पहाड़ियों, संकरी घाटियों, कम दृश्यता और तेज हवाओं के बीच हेलीकॉप्टर संचालन बेहद संवेदनशील होता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उड़ान से पहले मौसम की स्थिति का सही आकलन किया गया था? क्या पायलट को उड़ान भरने के लिए पर्याप्त सुरक्षित परिस्थितियां उपलब्ध थीं? क्या मौसम की चेतावनी को गंभीरता से लिया गया?
किसकी थी उड़ान की जिम्मेदारी, कौन देगा छह मौतों का जवाब?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल हेलीकॉप्टर संचालन करने वाली कंपनी और संबंधित विमानन नियामक व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर है। यदि मौसम की परिस्थितियां उड़ान के अनुकूल नहीं थीं तो हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति क्यों दी गई? क्या यात्रियों की सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता समय पर सेवा पूरी करने को दी गई?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन छह लोगों की जान जाने के बाद इन पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। यह केवल एक तकनीकी दुर्घटना मानकर फाइल बंद करने का मामला नहीं होना चाहिए।
पूरे बेड़े को किया गया ग्राउंडेड
हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंडेड कर दिया। यह कदम भी विमानन सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है।
अब यह जांचना जरूरी है कि हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति कैसी थी, उड़ान से पहले मौसम संबंधी रिपोर्ट क्या थी, ऑपरेशनल क्लीयरेंस किस आधार पर दिया गया और क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था।
उत्तराखंड की हेली सेवाओं पर फिर उठे सवाल
चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं हजारों श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक साधन हैं। लेकिन इन सेवाओं का संचालन यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर ही किया जाना चाहिए। उत्तराखंड में पहले भी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में हर बड़े हादसे के बाद जांच, सुरक्षा समीक्षा और जवाबदेही की मांग उठती है।
इस बार भी जरूरत केवल हादसे के कारणों का पता लगाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि भविष्य में किसी भी कंपनी या ऑपरेटर को मौसम और सुरक्षा मानकों से समझौता करने की छूट न मिले।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी हैं
मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बावजूद उड़ान का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
उड़ान से पहले मौसम की ताजा जानकारी और दृश्यता का आकलन किसने किया?
क्या हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति देना सुरक्षा मानकों के अनुरूप था?
क्या कंपनी ने पायलट को मौसम की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई थी?
क्या हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच और उड़ान संबंधी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच होगी?
यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
छह लोगों की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। इस हादसे की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उड़ान से पहले मौसम की स्थिति, कंपनी की भूमिका, अनुमति देने वाले अधिकारियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की एक-एक कड़ी की जांच होनी जरूरी है।
आखिर छह लोगों की जिंदगी की कीमत पर उड़ान क्यों? अगर मौसम अनुकूल नहीं था तो हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से रोका क्यों नहीं गया? अब जनता इन सवालों के जवाब चाहती है।
मृतकों का विवरण 👇
हादसे में जान गंवाने वालों में पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल (48) दिल्ली के शालीमार बाग निवासी थे। वहीं हेलीकॉप्टर में सवार पांचों यात्री कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान प्रताप बी. निंगराजू (41), अरुण सालुंके (44), सुधीर के. (49), एच.एस. नटराज (51) और शंकर गौड़ा वी.बी. (39) के रूप में सामने आई है।




