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ऋषिकेश। चेक अनादरण (चेक बाउंस) के मामले में ऋषिकेश न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को परिवादी को 5,25,959 रुपए की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के भी आदेश दिए हैं। राशि का भुगतान निर्णय की तिथि से दो माह के भीतर करना होगा।
माननीय न्यायालय अपर सिविल जज (जू.डि.)/न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऋषिकेश की न्यायाधीश तानिया मिड्डा ने 7 अगस्त 2026 को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, परिवादी हेमंत कुमार, निवासी गीता भवन, स्वर्गाश्रम, जिला पौड़ी गढ़वाल की आरोपी पवन कुमार उर्फ पम्मी, निवासी बालाकुमारी, पोस्ट माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला, जिला देहरादून से जान-पहचान थी। आरोपी ने अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए परिवादी से 3.50 लाख रुपए उधार लिए थे।
ऋण की राशि वापस करने के लिए आरोपी ने 25 दिसंबर 2020 का 3.50 लाख रुपए का चेक परिवादी को दिया। चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण ‘Funds Insufficient’ की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को विधिक नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की गई, लेकिन निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद परिवादी हेमंत कुमार ने अपने अधिवक्ता शुभम राठी के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने चेक को सिक्योरिटी के तौर पर दिए जाने की बात कहते हुए बचाव किया, लेकिन अपने पक्ष में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों तथा स्थापित विधिक सिद्धांतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने 3.50 लाख रुपए की मूल चेक राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना करते हुए कुल 5,25,959 रुपए की क्षतिपूर्ति परिवादी को देने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान दो माह के भीतर करना होगा। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

