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देहरादून:उत्तराखण्ड की बेशकीमती कृषि और सरकारी भूमि पर गिद्ध नजर गढ़ाए बैठे भू-माफियाओं और बाहरी बिल्डर्स के खिलाफ जिलाधिकारी सविन बंसल ने निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है। देहरादून के आमवाला तरला क्षेत्र में कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेचने के बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए जिलाधिकारी ने क्रेता और विक्रेता के खिलाफ शहर कोतवाली में संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया है।
मामला मौजा आमवाला तरला के खसरा संख्या 94ख, 134, 135 और 136 से जुड़ा है। यह भूमि PACL (पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और गोल्डन फॉरेस्ट से संबंधित बताई जा रही है। जिसके क्रय-विक्रय पर कोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है। शिकायत मिलने पर जब जांच हुई तो पता चला कि माफियाओं ने विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के माध्यम से प्रतिबंधित भूमि का वास्तविक विवरण छिपाकर उसकी रजिस्ट्री करा डाली। जिलाधिकारी के मुताबिक चंडीगढ़ पंजाब और अन्य राज्यों के उन बिल्डर्स पर मुकदमा दर्ज किया गया है जिन्होंने फर्जी अभिलेखों के आधार पर राज्य की जमीन का सौदा किया। डीएम ने इस मामले में सब-रजिस्ट्रार देहरादून की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाया है। उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी है। तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि यदि इस फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर दाखिल-खारिज हुआ है तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। माना जा रहा गया कि ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में हुई कार्रवाई की तर्ज पर अब देहरादून रजिस्ट्री कार्यालय का भी जल्द वृहद निरीक्षण किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने बताया कि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना और फर्जीवाड़े के दम पर जमीन का खेल किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। सरकारी और प्रतिबंधित भूमि को खुर्द-बुर्द करने वालों को जेल भेजा जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बाहरी राज्यों के भू-माफिया जो राज्य की प्रतिबंधित संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं, उन पर पैनी नजर रखी जा रही है। रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 83 के तहत मामला दर्ज कर अब अन्य संदिग्ध रजिस्ट्रियों की भी फाइलें खोली जा रही हैं।











