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ऋषिकेश:कहा जाता है कि माता-पिता के लिए अपनी संतान के शव को कंधा देना दुनिया का सबसे भारी बोझ होता है। लेकिन चमोली के एक दंपत्ति ने इस दु:ख की घड़ी में भी जो साहस दिखाया उसने मानवता और समाज के सामने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसे भविष्य में याद रखा जाएगा।
इस दंपत्ति ने अपनी महज 9 दिन की मृत बेटी का शरीर मेडिकल साइंस रिसर्च के लिए एम्स ऋषिकेश को दान कर दिया है। जानकारी के मुताबिक 9 दिन पहले श्रीनगर बेस अस्पताल में जब इस नन्हीं परी का जन्म हुआ था तो परिवार में खुशियों का ठिकाना नहीं था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जन्म के साथ ही मासूम एक गंभीर आंतरिक बीमारी की चपेट में आ गई। माता हंसी और पिता संदीप राम बेहतर इलाज की उम्मीद में उसे एम्स ऋषिकेश लेकर आए। यहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की। एक जटिल सर्जरी भी हुई लेकिन मासूम की सांसों की डोर टूट गई।
बेटी के जाने के गम में डूबे माता-पिता जब बदहवास थे, तब मोहन फाउंडेशन के प्रोजेक्ट लीडर संचित अरोड़ा और लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग ने उनसे संपर्क किया और उन्हें देहदान के महत्व के बारे में बताया। महत्व जानकर माता-पिता ने अपने आंसुओं को पोंछते हुए बेटी के देह दान का कठोर और महान निर्णय लिया। गोपाल नारंग ने बताया कि संदीप राम और हंसी का 6 साल का एक बेटा है।




