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ऋषिकेश। अगर आप ऋषिकेश की एम्स रोड पर आवाजाही कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। इस सड़क पर चलना अब किसी परेशानी से कम नहीं है। यहां विकास कार्य के नाम पर उड़ रही धूल लोगों की सेहत पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि सड़क से गुजरने वाले लोगों को धूल के गुबार के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर👆
दरअसल,, वीरभद्र रोड (एम्स रोड) पर यूपीसीएल (उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) की ओर से भूमिगत बिजली लाइन बिछाने का कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य के लिए सड़क को जगह-जगह खोद दिया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुदाई के बाद सड़क की स्थिति सुधारने और धूल को नियंत्रित करने की दिशा में कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। पूरी सड़क पर मिट्टी और धूल फैली हुई है। वाहनों की लगातार आवाजाही के चलते धूल के गुबार उठते रहते हैं।
एम्स रोड पर दिनभर वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क से गुजरने वाले लोगों के चेहरे और कपड़े धूल से भर जा रहे हैं। वहीं, सड़क किनारे संचालित खाने-पीने की दुकानों के भीतर तक धूल पहुंच रही है। इससे दुकानदारों के कारोबार के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की स्वच्छता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे गंभीर चिंता लोगों के स्वास्थ्य को लेकर है। लगातार उड़ती धूल में सांस लेना किसी के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को इससे अधिक दिक्कत हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो लोगों को खांसी, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।हैरानी की बात यह है कि इस कार्य को शुरू हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक सड़क पर उड़ती धूल से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव होता नजर आ रहा है और न ही खुदाई के बाद सड़क को व्यवस्थित करने की दिशा में गंभीरता दिखाई दे रही है।
वहीं, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है और कार्य की गुणवत्ता तथा व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए विभागीय अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहते। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जनता की परेशानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
अब सवाल यह है कि क्या यूपीसीएल के अधिकारी किसी बड़े हादसे या लोगों के बीमार पड़ने का इंतजार कर रहे हैं? आखिर एक महीने से सड़क पर उड़ रही धूल विभागीय अधिकारियों को क्यों दिखाई नहीं दे रही है? क्या विकास कार्यों के नाम पर आम जनता को इस तरह परेशान करना उचित है?
स्थानीय लोगों की मांग है कि यूपीसीएल तत्काल इस मामले का संज्ञान ले। सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव कराया जाए, खुदाई वाले हिस्सों को जल्द व्यवस्थित किया जाए और कार्य पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत कराई जाए। साथ ही ठेकेदार की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
विकास के नाम पर लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, न कि ऐसी धूल और अव्यवस्था जिसमें सड़क पर चलना ही सेहत के लिए खतरा बन जाए।




